नहीं होगा AIDS अगर पीते रहेंगे बकरी का दूध

नहीं होगा AIDS अगर पीते रहेंगे बकरी का दूध

बकरी का दूध

बकरी के दूध को दोयम दर्जे का समझ जाता है लेकिन यह दूध कई मामलों में औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसमें कई प्राण रक्षक तत्व तो गाय के दूध से भी ज्यादा होते हैं।

बकरियां जंगल में औषधीय पौधों को ही अपना आहार बनाती हैं और उनके दूध में इसकी सुगंध हो जाती है। इस दूध में औषधीय गुणों की मात्रा भी बहुत होती है। बकरी का दूध मधुर, कसैला, शीतल, ग्राही, हल्का, रक्त-पित्त, अतिसार, क्षय, खांसी एवं ज्वर को नष्ट करने की क्षमता रखता है। यह वैज्ञानिकों द्वारा सत्यापित तथ्य है। बकरी पालन करने वाले लोग भी इसीलिए रोगों का शिकार कम बनते हैं क्योंकि उनका पालन करने के कारण बकरी के दूध से उनका संपर्क बना रहता है।

बकरी के दूध में मौजूद प्रोटीन गाय, भैंस की तरह जटिल नहीं होता। इसके चलते यह हमारे प्रतिरोधी रक्षा तंत्र पर कोई प्रतिकूल असर नहीं डालता। संयुक्त राज्य अमेरिका में गाय का दूध पीने से कई तरह की एलर्जी के लक्षण बच्चों में देखे जाते हैं। इनमें लाल चकत्ते बनना,पाचन समस्या, एक्जिमा आदि प्रमुख हैं। बकरी का दूध इन सबसे स्वयं बचाता है।

बकरी का दूध अपच दूर करता है और आलस्य को मिटाता है। इस दूध में क्षारीय भस्म पाए जाने के कारण आंत्रीय तंत्र में अम्ल नहीं बनाता। थकान, सिर दर्द, मांस पेशियों में खिंचाव,अत्याधिक वजन आदि विकार रक्त, अम्लीयता और आंत्रीय पीएच के स्तर से संबंध रखते हैं। बकरी के दूध से म्यूकस नहीं बनता है। पीने के बाद गले में चिपचिपाहट भी नहीं होती। मानव शरीर के लिए जरूरी सेलेनियम तत्व बकरी के दूध में अन्य पशुओं के दुग्ध से ज्यादा होता है। यह तत्व एण्टीऑक्सीडेंट के अलावा प्रतिरोधी रक्षा तंत्र को उच्च व निमA करने का काम करता है। एचआईवी आदि रोगों में इसे कारगर माना जाता है। इसमें आने वाली विशेष गंध इसके औषधीय गुणों को परिलक्षित करती है।

वैज्ञानिकों को अनुसंधान के दौरान पता चला है कि बकरी का दूध एड्स के मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में मददगार होता है.

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